Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

क्या न्याय हो गया (पीटीआई शिक्षकों के साथ)



  

अभी हाल में ही हरियाणा में 10 साल से लगे हुए PTI teachers को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उन्हे नौकरी से निकाल दिया गया है  हालाँकि यह सुप्रीम  अंतिम निर्णय है तो इसे और कही भी चुनौती नहीं दी जा सकती और न ही इसे कोई बदल सकता है | 

लेकिन  मेरा एक question है की क्या यह न्याय हुआ है या अन्याय, ये सही भी है या नहीं ?

क्योंकि यह देश के सर्वोच्च न्यायालय का फैसला है तो न्याय भी है और सही भी , ऐसा हम मान सकते है और मानना भी पड़ेगा | 


लेकिन जनाब जब कोई  भी यह सोच कर 10 साल तक कोई स्थाई नोकरी करेगा की अब 60 वर्ष तक उन्हें यहाँ से कोई हटा नहीं सकता और जब तक वो स्वयं से कोई  गलत  कार्य नहीं  करेगें , और फिर अचानक से उन्हें 10 साल के कार्येकाल के बाद निकाल देना, अवश्य ही न्याय नहीं है।


इस PTI teachers Recruitment प्रक्रिया में अवश्य ही गड़बड़ी हुई है और बहुत बड़ी संख्या में फर्जी Degree होल्डर्स को और अन्य कई तरह से फर्जी लोगो का चयन हुआ है  लेकिन इनके पीछे सही तरीके से चयनित लोगो का तो कोई हाथ नहीं है | माना की इस भर्ती प्रक्रिया में 50% सही लोगो का और 50 % गलत लोगो का चयन हुआ होगा , वैसे यह गलत चयनित लोगो का सबसे ज्यादा अनुमानित आकड़ा माना है |  माना कि , असल मायने में इतने लोग है नहीं | 

अब मै पूछू की क्या गलत चयनित लोगो के पीछे सही चयनित लोगो का हाथ है या उस समय यानी 2010 के चयनितकर्ताओ का ?

तो गलत चयनित लोगों के लिए चयनकर्ता ही पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं,आखिर उन गलत लोगों का
चयन तो उन्ही लोगो ने किया है ना | सर्वोच्च न्यायालय ने 2010 की भर्ती प्रक्रिया को रद्द करके 1983 PTI Teachers को तो निकाल दिया , लेकिन उन चयनकर्ताओं का क्या ?

हालांकि उच्च न्यायालय ने एच एस एस सी (HSSC Board)बोर्ड की भी गलती मानते हुए कुछ जुर्माना लगाया था | लेकिन क्या गलत लोगों का चयन एक गलती मात्र है, मेरे ख्याल से तो नहीं, और अगर है तो यह आगे आनेवाले समय में अन्य किसी भर्ती प्रक्रिया में चयनित लोगों को भी नई समस्याएं खड़ी कर सकती है,क्योंकि मान लेते हैं आज किसी भर्ती प्रक्रिया में कुछ लोगों का चयन हो और उसमें कुछ फर्जी लोगों का चयन भी गलती से हो जाए और फिर आज से 10 साल बाद भर्ती प्रक्रिया में धांधली हुईहै कहकर आज वाली भर्ती को रद्द कर इन लोगों को भी हटा दिया जाएगा , क्योंकि यह तो एकगलती है,और ये कभी भी किसी से भी हो सकती है क्योंकि आख़िर इंसान है तो गलतियों का पुतला ही | 

लेकिन मेरे ख्याल से तो यह एक गलती मात्र नहीं है, जैसे ईश्वर में विश्वास रखने वाले आस्तिक लोगों का मानना है की ऊपर वाले की मर्जी के बिना तो वृक्ष का एक पत्ता भी नहीं हिलता, वैसे ही मेरा भी कुछ हद तक मानना है कि HSSC Board के चयनकर्ताओं , उच्च अधिकारियो , मंत्री और नेताओ बिना एक भी फर्जी आदमी का चयन होना संभव नहीं है | हो सकता है मेरा मानना गलत भी हो लेकिन आप तनिक इस बात पर विचार करके देखें | वैसे मेरे कुछ सुझाव है जो लगभग सुझाव मात्र ही हैं, क्योंकि मैं न तो किसी न्यायालय का जज हूं और ना वकील , मै तो अपने सुझाव और विचारो को लिख मात्र सकता हु , भला लिख दिए |

1) पहला सुझाव :-

इस भर्ती प्रक्रिया में भर्ती हुए तमाम लोगो की जांच करके मात्र फर्जी चयनित लोगो को ही नौकरी से हटाया जाये , न की भर्ती रद्द करके सभी को हटाया जाये क्युकी जैसे घी और शहद में मक्खी के गिरने पैर, मक्खी को निकल कर फेंका जाता है ना कि शहद और घी को | 
इसलिए जिनका चयन सही तरीके से हुआ है, उन्हें ना हटाया जाए, क्योंकि उन्हें हटाना मेरे ख्याल से न्याय पूर्ण नहीं है

2) दूसरा सुझाव :-

अगर जांच से पता लगया जा सकता कौन कौन फर्जी भर्ती हुए है , तो और अधिक गहनता से जांच में यह भी अवश्य ही पता लगाया जा सकता है की इन फर्जी लोगो की भर्ती में किन किन चयनकर्ताओं , अधिकारियो , नेताओ और मन्त्रियों का हाथ रहा है , मेरे ख्याल से सबसे जयदा सजा तो इन्ही सब लोगो को मिलनी चाइये जिन्होंने यह सब फर्जीवाड़ा किया, और अगर इनको सजा मिलती गई तो यह मेरा पूरा विश्वास है की आगे किसी भी तरह की भर्ती में धान्द्ली होने के प्रयाश शुन्य के बराबर हो जायेंगे , क्युकी जनाब जब आपकी अपनी प्रतिस्ठा को ठेस पहुंचे या अपनी नौकरी को खतरे में डालना पड़े तो कोई भी ऐसा अपराध करने का प्रयास नहीं करेगा , शायद मेरे ख्याल से यह न्याय पूर्ण होगा और धांधली करने वालों के लिए भविष्य में सिख भी |

3) तीसरा सुझाव :- 

सजा तो उन लोगों को भी होनी चाहिए जो फर्जी भर्ती हुए हैं, क्योंकि किया तो उन लोगों ने भी गलत ही है, लेकिन इन लोगों को सजा उन अधिकारियों , मंत्री और नेताओं से तो कम होनी चाहिए, क्योंकि इन्होंने तो समाज की एक आम विचारधारा के तहत नौकरी पाने के लिए हर संभव प्रयास किया होगा, जिसमें रास्ता गलत अपना लिया वह अलग बात है, तो मेरे अनुसार सजा के पात्र तो ये भी हैं लेकिन अधिकारी, मंत्री और नेताओं से कम, यह अवश्य ही न्याय पूर्ण है|


ये कुछ सुझाव है मेरे मै कुछ सोचता या विचार करता हु वह लिखने का पप्रयास किया है, इस लेख के माध्यम से मेरा मकसद किसी को ठेस पहुंचना नहीं है , परन्तु जिन शिक्षको को हटाया गया है उनके पर्ति मेरी सहानुभूति है |                                                                            

गौरव शर्मा
CODST LUVAS
Hisar                                                           

Post a Comment

2 Comments

Somveer Berwal said…
घास के ढेर में से सुई ठुठनी है तो ढेर को आग से जलाने की शक्ति परापत करो प्रिय मित्र
TechnoWorld said…
क्यों नहीं मित्र।
परन्तु अगर हम एक चुंबक से धागा बांधकर कोशिश करे तो घास भी अपनी, और सुई भी।

Have a good day Dear